रिपोर्टर@देवानंद विश्वकर्मा अनूपपुर। मकर संक्राति के अवसर पर आज पवित्र नगरी अमरकंटक में हजारो लोगो ने आस्था की डूबकी लगायी। नर्मदा उद्गम कुण्ड में स्नान के लिये तड़के 4 बजे से ही लोगों का तांता लग गया। आज के दिन करीब 1 हजार श्रद्धालू अमरकंटक पहुंचकर पवित्र स्नान करेंगे। भीड़ को देखते हुए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किये गये हैं। इस समय अमरकंटक में कड़ाके की ठण्ड पड़ रही है लेकिन लोगो की आस्था पर इसका कोई असर नहीं है।आज के दिन श्रद्वालू तिल और खिचडी का दान करते है मान्यता है कि पवित्र नदियों के किनारें सुबह स्नान कर सूर्य देवता के दर्शन करने के पश्चात तिल और खिचडी का दान करने से पुण्य प्राप्त होता है। जिसमें आसपास के लोगो सहित ग्रामीणांचलो से आये हुए श्रद्धालुओं ने सोन नदी में स्नान करते हुए भगवान शिव शंकर का पूजा अर्चन करते हुए सूर्यादेव भगवान प्रणाम किये, इसके बाद श्रद्धालुओं ने लगे मेले में भण्डारण का प्रसाद ग्रहण कर मेले का आनंद उठाये, इसके बाद मिठाईयो के साथ बच्चो के लिए खिलौने खरीदे। तिल-गुड़ का अपना महत्व प्रातः तिल से स्नान, सूर्यदेव को तिल मिले जल का अर्पण, भगवान शंकर एवं विष्णु को तिल मिष्ठान्न का भोग, तिल का हवन, भोजन में तिल का उपयोग तथा तिल गुड का दान किय्ाा जाता है। आज भगवान सूर्य की आराधना का महत्व है। इस दृष्टिकोण से अमरकंटक से उद्गम माँ नर्मदा नदी में श्रद्धालुओ ने डुबकी लगाई व दान-पुण्य्ा कर पूजन किया। इसी तरह से जिले के प्रवाहित पुण्य सलिला सोन नदी के तटों पर मेले लगे व दिनभर लोगों का नदी में स्नान करने का क्रम लगा रहा। पूरे उत्साह व सौहाद्र्रपूर्ण माहौल में मेलों का आयोजन सम्पन्न हुआ। उल्लेखनीय है कि मकर संक्रांति का पर्व वैसे तो पूरे माघ महीने असरकारक रहता है। लेकिन शुरूआती दौर 14 व 15 जनवरी के दिन संक्रांति पर्व का अपना अलग ही महत्व रहता है। इस तिथि को आम लोग सोन नदी में स्नान करने व पुण्यदान कर तिल के लड्डुओं आदि खाने का महत्व देते हैं, इस परम्परा का लोगों ने शनिवार को निर्वहन किय्ाा। मकर संक्रांति से सूर्य मकर राशि में प्रवेश करने के साथ ही दक्षिणायन से उत्तरायन हो जाता है। कहा जाता है कि मकर संक्रांति में दान आदि कर कम समय में ही पुण्य कमाया जा सकता है। मकर संक्रांति पर्व पर जिले में प्रवाहित पवित्र नर्मदा, सोन, जुहिला सहित केवई, तिपान, बकान नदियों के अलावा तालाबों व मंदिरों के किनारे मेला भरा जहां पहुंचकर लोगों ने मेले का आनंद उठाया। अमरकंटक में पहुंचे श्रद्धालू मकर संक्रांति पर अमरकंटक में दूरदराज से हजारों श्रद्धालुओं पहुंचे और नर्मदा कुण्ड में डुबकी लगा पूजा-अर्चना कर दान पुण्य किया। वहां श्रद्धालुओं का शुक्रवार को ही पहुंचना प्रारंभ हो गया था। सुबह स्नान के बाद भगवान सूर्य को अर्ध्य दिया गयाा यहां प्रतिवर्ष की भांति मेला भी लगा। अमरकंटक में शुक्रवार को श्रद्धालुओं के पहुंचने का क्रम अपराह्न तक जोरों से जारी रहा। लोगों ने पूजन सामग्री सहित आवश्यक वस्तुओं की खरीददारी की। ठण्ड के बावजूद लोगों ने स्नान, मंदिरों के दर्शन तथा मेला घूमने के प्रति उत्साह में कमी नहीं देखी गई। मेले में मनोरंजन करने हर कोई पहुंचता है, अनूपपुर के सीतापुर मेले में वैसे तो छोटे-बडे सभी आनंद उठाने पहुंचे लेकिन इसका उत्साह बच्चों मे काफी दिखाई दी। बच्चों ने खानपान की ख्वाहिश पूरी की, गुब्बारे, खिलौने व बांसुरी का क्रय्ा किय्ाा मेले में खिलौने की दुकान पर बच्चों की सर्वाधिक भीड रही। इसी तरह झूला-झूलकर बच्चों ने खूब मस्ती की। मेले में भाग लेने वालों ने अपने संबंधी व मित्रो के गले मिलकर संक्रांति पर्व की बधाईयां दी। मेला आने का लोगों का दूसरा उद्देश्य यही रहा कि वे अपने मित्राओं व परिचितों से मेले के बहाने मिल लें। घर वापस आते समय मेले से गन्ना रखा हुआ था। अनूपपुर शहर में भी चौराहों पर गन्ने की दुकाने लगी थी लिहाजा जो मेला नहीं गए उन्होंने गन्ना खरीदी और सेवन किया। गन्ना महंगा होने के बावजूद लोगों ने खरीदा। मेले में उमडी भीड जिले की सोन नदी के तट पर मेले का आयोजन किया गया जहां पर शिव मंदिर में श्रद्धालुओं का पूजा-अर्चन कर नदी में स्नान किये। वहीं पं. अविरल गौतम ने बताया कि ग्राम बरगवां में ऐतिहासिक पर्व मेला का आयोजन होता है यहां की भगवान श्री हनुमान जी की प्रतिमा बहुत प्राचीन है तथा मंदिर मैदान में कई सालों से मेला लगता आ रहा है। जहां हनुमान मंदिर ख्याति प्राप्त प्रसिद्ध है। हनुमान जी की यह प्राण प्रतिष्ठा युक्त सभी दुखों का निवारण करने वाले हैं। इस मैदान में लगने वाला मेला ऐतिहासिक है। विगत कई सालों से हमारे संस्थान के द्वारा इस मेला परिसर में उद्योग में होने वाली उत्पादन से संबधित जानकारियों के साथ साथ आपात कालीन स्थिति में गैस रिसाव के समय किस प्रकार सजग व सावधान रहना है। क्षेत्रीय जनों को विडियों फिल्म उद्योय में इस्तेमाल किये जाने वाले संयंत्र व मजदूरों को सुरक्षा उपकरणों से लेस किया जाता है। उसकी प्रदर्शनी एवं झांकी जनहित में दिखाया जाता है। गैस रिसाव के समय किस प्रकार गैस से बचा जाये उसके उपाये व सुझाव प्रबंधन के अधिकारियों के द्वारा मेले में दिया जाता है।