अनूपपुर

राष्ट्रीय पर्व पर भी बच्चो को नहीं मिला विशेष व्यंजन

मामला पाठशाला नायक टोला विद्यालय का

रिपोर्टर@संजीत कुमार सोनवानी

अनूपपुर। प्रदेश सरकार के द्वारा गणतंत्र दिवस समारोह पर प्रदेशभर के प्राथमिक और मध्यामिक स्कूलो में मध्यान्ह भोजन की व्यवस्था की गई और बच्चो को उस दिन विशेष व्यंजन तैयार करने स्वसहायता समूहो को आदेशित किया गया था, लेकिन जनपद पंचायत पुष्पराजगढ़ के ग्राम पंचायत करनपठार के नायक टोला में स्थित शासकीय प्राथमिक विद्यालय में विशेष भोज कार्य क्रम शासन-प्रशासन के द्वारा आदेशानुसार मोती महिला स्वसहायता समूह को मध्यान्ह भोजन संचालन की जिम्मेदारी दी गई है। जिसमें समूह द्वारा दाल,सब्जी, तेल, नमक, हल्दी, आदि दिया जाता है, परंतु राष्ट्रीय कार्यक्रम पर विशेष भोज के दौरान समूह द्वारा चावल,दाल, पूड़ी, सब्जी ही प्रदाय गया। राष्ट्रीय कार्यक्रम पर खीर, हलुवा का भी प्रावधान है जो समूह द्वारा नहीं दिया गया। ग्रामीण जनो को मौजूदगी में जो चार पंचो के समक्ष पंचनामा तैयार किया गया जो सत्य एवं सहीं है। जिसमें एसएमसी अध्यक्ष सुजीत सिंह, लीलन सिहं उपसरपंच, मनोज बंजारा, हेमा सिंह, शिवकुमार, बाबूलाल मोतील लाल स्वसहायता समूह करनपठार की अध्यक्ष श्रीमती धनितिया बाई, सचिव श्रीमती मीरा बाई माझी इस समूह को 2017 में कलेक्टर द्वारा अंतिम अवसर प्रदान किया गया था और आज भी स्कूल नायक टोला करन पठार में मध्यान्ह भोजन में गुणवत्ता का ध्यान नहीं रखा जा रहा है। 26 जनवरी 2020 को पंचनामा बनाया गया है गुलाब माझी के द्वारा राषन की सामग्री दी जाती है।
स्कूल में बन रहा गुणवत्ताविहीन भोजन
उक्त पाटशाला में मध्याह्न भोजन योजना की गुणवत्ता सुधारने की जगह गुणवत्ता विहीन भोजन बच्चो को बनाकर खिलाया जाता है ऐसे स्कूलो में जिला प्रशासन के द्वारा समय-समय पर निरीक्षण नहीं किया जाता है इसी वजह से समूह संचालक अपने मनमाने तरीके से खाद्य सामग्री खरीदकर स्कूल में बच्चो को भोजन बनवाकर खिलाते है। ग्रामीणों ने बताया कि देश के राष्ट्रीय पर्व गणतंत्र दिवस के दिन बच्चो को पूड़ी, सब्जी एवं भोजन नहीं खिलाया गया, ऐसे में बच्चों को खाली पेट स्कूल में पढ़ाई करना पड़ता है कई स्कूलों में मीनू का पालन नहीं होने सहित अन्य शिकायतें सामने आ रही है।
शालाओं का नहीं होता निरीक्षण
जिला षिक्षा अधिकारी एवं खण्ड शिक्षा अधिकारी के द्वारा सिर्फ निरीक्षण के नाम पर हिदायत भर दी जाती है, लेकिन स्वसहायता समूहो की जांच भी नहीं की जाती है यह भी नहीं देखा जाता है कि शालाओं में पढ़ने वाले बच्चो को मध्यान्ह भोजन मीनू के आधार दिया जा रहा है या नहीं। वहीं ग्रामीण ने बताया कि मध्याह्न भोजन संचालित करने वाली समूहो की महिलाएं भोजन की गुणवत्ता सुधारने की विषय में विचार भी नहीं करती है।

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