अनूपपुर। भालूमाड़ा थाना क्षेत्र के केवई नदी ,पसान रेत खदान, शिव लहरा घाट, ग्राम पौड़ी सोन नदी, बदरा गोडारू नदी, सहित नगर के आसपास नदी नालों से बड़े पैमाने पर अवैध रेत का खनन जोरों से चल रहा है जबकि जानकारी के मुताबिक अनूपपुर जिले में कहीं भी रेत की वैध खदानें नहीं है साथ ही साथ पूरे प्रदेश में लाॅकडाउन होने के कारण अनूपपुर कलेक्टर द्वारा शाम 7 बजे से लेकर सुबह 7 बजे तक कर्फ्यू का आदेश दिया गया है, इसके बाद भी पूरे क्षेत्र में शाम होने के बाद चारों तरफ ट्रैक्टरों की आवाजाही चालू हो जाती है और यह क्रम कोई आज से नहीं, बल्कि जिस दिन से पूरे देश में लाॅकडाउन लागू किया था 22 मार्च से उसी दिन से पूरे क्षेत्र के रेत माफिया रात के नदी, नालों में अवैध रूप से रेत का खनन परिवहन भंडारण लगातार करते आ रहे हैं, जिसकी शिकायत शासन प्रशासन तक की गई। शिकायत की गंभीरता को देखते हुए भालूमाड़ा पुलिस ने 30 मई को जिस दिन-दिनभर कर्फ्यू था रात के समय सोन नदी पौड़ी घाट से एवं गोड़ारू नदी से रेत लेकर जा रहे दो ट्रैक्टर वाहनों को पकड़ कर कार्रवाई की गई थी। रेत माफियाओं को जरा भी भय नहीं रेत माफियाओं को जरा भी भय नहीं रहा और 31 मई को ही रात 7 बजे पुलिस को खबर मिली कि सोन नदी पोड़ी घाट से अवैध उत्खनन हो रहा है, जहां पुलिस ने पहुंचकर रेत से लदे ट्रैक्टर वाहन को पौडी ग्राम के खरका टोला आंगनबाडी स्कूल के पास से जप्त किया। यहां पर जैसे ही पुलिस ने ट्रैक्टर को पकड़ा वैसे ही नेताओं के फोन बजना शुरू हो गया। इन सफेदपोश नेताओं में क्या सत्ता, क्या विपक्ष? लेकिन भालूमाड़ा थाना प्रभारी ने किसी की बात नहीं सुनी और उन्होंने अपने फर्ज को निभाते हुए अवैध रेत ट्रैक्टर को थाने लाकर कार्यवाही किए। रेत लदे पकड़े गये ट्रैक्टर थाना प्रभारी ने बताया कि शाम लगभग 7 बजे उन्हें सूचना मिली थी कि ग्राम पौड़ी सोन नदी घाट से अवैध रूप से रेत का खनन किया जा रहा है। जानकारी पर भालूमाड़ा से पुलिस टीम रवाना की गई तब तक ट्रैक्टर चालक रेत को लेकर नदी से बाहर जा रहा था जिसे गांव के खरका टोला ऑंगनबाडी स्कूल के पास पकड़ा गया और थाने लाकर कार्यवाही की गई। नीले कलर का स्वराज ट्रैक्टर जिसमें नंबर अंकित नहीं है ट्रैक्टर मालिक उमेश केवट पिता श्वेत राम केवट उम्र 38 वर्ष निवासी पौड़ी है जिसका इस्तगासा क्रमांक 3/20 धारा 18 (1)18 (5) मध्य प्रदेश उत्खनन भंडारण परिवहन अधिनियम 2006 के तहत कार्रवाई कर खनिज अधिकारी महोदय न्यायालय पेश किया गया। ट्रैक्टर में लगभग 3 घन सेंटीमीटर बालू जिसकी कीमत 2500 है। उक्त कार्रवाई में थाना प्रभारी आरएन आर्मो, एसआईआर एन तिवारी, आरक्षक अभिषेक चैहान, विवेक त्रिपाठी, सूर्यभान सिंह, करमजीत सिंह, अजीत सिंह एवं सनी गुप्ता शामिल रहे। माइनिंग विभाग में हो जाती है समझौता थाना क्षेत्र में अवैध रेत खनन का बहुत बड़ा रैकेट काम कर रहा है जहां पर पक्ष विपक्ष के नेता अवैध रेता कारोबारी सब एक हैं सूत्रों की माने तो जो ट्रैक्टर वाहन इनके साथ मिलकर काम नहीं करता उनके वाहन को वन विभाग माइनिंग विभाग के तहत पकड़वा दिया जाता है और जब ट्रैक्टर पकड़ जाता है तब यही तथाकथित नेता जाकर अधिकारियों के पास समझौता कराते हैं। अवैध रेत खनन की यदि कोई जानकारी वन विभाग को देता है तो वन विभाग के कोतमा रेंजर स्पष्ट रूप से कार्यवाही करने से मनाकर देते हैं इतना ही नहीं वह तो अवैध कारोबारियों का समर्थन करते हुए यह बात बोलते हैं कि फलां व्यक्ति को कलेक्टर का आदेश है तो हम कार्रवाई कैसे करें, आपको शिकायत करना है तो आप पुलिस को कीजिए हम कुछ नहीं कर सकते और तत्काल ही इस बात की जानकारी संबंधित रेत माफिया को विभाग के अधिकारी देते हैं जब वही रेत माफिया वन विभाग को दूसरों के वाहन पकड़ने की चाहत रखता है तो वन विभाग तत्काल कार्यवाही कर अवैध रेत खनन में लगे वाहनों को पकड़ने से नहीं चूकते पिछले लगभग 20-25 दिन पूर्व ही कोतमा वन विभाग द्वारा अवैध रेत खनन में ट्रैक्टरों को पकड़ा गया, लेकिन पसान रेत खदान में लगे वाहनों को उन्होंने देखना भी मुनासिब नहीं समझा यहां तक कि भालूमाड़ा थाना क्षेत्र के सीमा से भी उन्होंने ट्रैक्टर को पकड़ा जो उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं था। क्षेत्र के सबसे बड़े अवैध रेत कारोबारी सभी जगह जा जा कर यह बताते हैं कि मुझे कलेक्टर महोदय ने 6 महीने के लिए अतिरिक्त रेत खदान का परमिशन दिया है और आज भी इनके वाहन खुलेआम रेत का अवैध खनन परिवहन भंडारण कर रहे हैं। ठेका समाप्त के बाद उत्खनन जारी नगर के पसान रेत खदान में जिसका ठेका समाप्त हो चुका है लेकिन पुराने ठेकेदार द्वारा लगातार रेत का खनन परिवहन किया जा रहा है जहां अन्य ट्रैक्टर मालिकों वाहन चालकों में रेत खनन को लेकर मारपीट वाद विवाद भी हो चुका है जिसकी शिकायत भी थाने में दर्ज कराई गई है। यदि नगर में अवैध खनन पर रोक नहीं लगाई गई तो कभी भी कोई भी बड़ी घटना दुर्घटना हो सकती है। पत्रकारों को दी जाती है धमकी क्षेत्र में किसी भी प्रकार की सामाजिक राजनैतिक समस्या मूलक जानकारी के लिए लोग पत्रकारों का सहारा लेते हैं, ऐसे में नगर में चल रहे अवैध कार्यों सामाजिक बुराइयों के बारे में भी लोग सीधे पुलिस से शिकायत ना करते हुए पत्रकारों के माध्यम से अपनी बात प्रशासन तक पहुंचाने का प्रयास करते हैं और जब पत्रकार इन बातों को अपने न्यूज के माध्यम से शासन प्रशासन तक पहुंचाते हैं तब यह रेत माफिया प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से धमकी देने से नहीं चूकते यहां तक कि उन्हें झूठे केस में फंसाने उन पर ब्लैकमेलिंग का आरोप लगाने तरह तरह के षड्यंत्र करने का प्रयास भी कर रहे हैं।