राजेश सिंह अनूपपुर। पब्लिक रिलेशन सोसाइटी ऑफ इंडिया के भोपाल चैप्टर, यूनिसेफ और निओविजन सोसायटी द्वारा संयुक्त रूप से एक मीडिया वेबीनार का आयोजन किया गया। इसका विषय था कोरोना काल में मीडिया की भूमिका। इस वेबिनार मे प्रदेश के सभी नौ संभागों के वरिष्ठ प्रिंट मीडिया के लगभग 100 पत्रकार शामिल हुए। इस वेबीनार में राज्य स्वास्थ्य सूचना शिक्षा संचार ब्यूरो के संचालक बसंत कुर्रे विशेष अतिथि के रुप में तथा वरिष्ठ पत्रकार, लेखक तथा राजनैतिक विश्लेषक गिरिजा शंकर वेबीनार मुख्य अतिथि रहे। कार्यक्रम मे स्वागत उद्बोधन पब्लिक रिलेशन सोसाइटी ऑफ इंडिया के नेशनल काउंसिल सदस्य मनोज द्विवेदी ने दिया तथा आभार प्रदर्शन भोपाल चैप्टर के डॉ. संजीव गुप्ता ने किया। इस बेवीनार में अनूपपुर जिले से वरिष्ठ पत्रकार राजेष सिंह को भी शामिल होने का अवसर प्राप्त हुआ। मीडिया महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है बसंत कुर्रे ने कहा कि कोरोना से बचाव के उपाय बहुत ही सामान्य है किंतु लोग इनका पालन करने में कहीं लापरवाही कर जाते हैं। ऐसी स्थिति में मीडिया इस दिशा में सकारात्मक भूमिका निभा सकती है। जन सामान्य को संक्रमण से बचाव के इन उपायों की जानकारी पहुचाने के लिए शासन हर संभव प्रयास कर रहा है, और इसी क्रम में आज से प्रदेश में ष्सहयोग से सुरक्षाष् अभियान का शुभारम्भ भी माननीय मुख्यमंत्री द्वारा किया गया है। श्री कुर्रे ने कहा की मीडिया लोगों के अभिमत निर्धारण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। भेदभाव से समाज को बचाना होगा वरिष्ठ पत्रकार गिरिजा शंकर ने कहा की कोरोना संक्रमण का यह दौर हम सबके लिए एक नया दौर है। ऐसे में हम सबको अपनी सकारात्मक भूमिका तलाशनी होगी। इस बदले परिदृश्य में हम समाज को सही दिशा में बनाए रखने के लिए क्या योगदान दे सकते हैं, इस विषय में हम सबको अपनी अपनी जगह चिंतन और प्रयास करने होंगे। उन्होंने कहा कि कोरोना के कारण न सिर्फ सामाजिक जीवन, अर्थव्यवस्था पर असर पड़ा है बल्कि मनोवैज्ञानिक रूप से भी लोगों पर गहरा असर पड़ा है। एक पत्रकार होने के नाते हम सब की यह भूमिका होनी चाहिए कि हम लोगों में व्याप्त भय को दूर करें। हमें नैतिक ढंग से कार्य करने की आवश्यकता है। हमें यह देखना होगा कि आवश्यक भय जैसे कि, संक्रमण से बचने के उपायों का पालन करना, सावधानियां अपनाना आदि तो बना रहे। लेकिन अनावश्यक भय जैसे लोगों से कोरोना के कारण भेदभाव करने से समाज को बचाना होगा। हमें एक विश्वास का माहौल तैयार करने की जरूरत है। लोगों को यह भरोसा दिलाना होगा कि यह दौर जल्द ही गुजर जाएगा। भयावहता का जो वातावरण है उसे तेजी से सामान्य करने की दिशा में कार्य करना होगा। कोरोना योद्धाओं को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता है। भय को विश्वास में बदलने की आवश्यकता है। हम सभी के लिए यह एक नया अनुभव है, इसलिए इसकी कोई स्थाई चिकित्सा भी नहीं है। दिशानिर्देश भी बार-बार बदल रहे हैं। हम सबको स्वयं जानकारी रखते हुए, सही और प्रामाणिक जानकारी देना जरूरी हो जाता है। अधूरी जानकारी से ही अज्ञात भय उत्पन्न होता है। भय का मनोविज्ञान खतरनाक होता है। हमें चाहिए कि हम तकनीकी शब्दावली के बदले बोलचाल के आसान शब्दों का प्रयोग करें। कोरोना काल में जब हमारे लोकाचार स्थगित हो चुके हैं, ऐसे समय में लोगों तक मीडिया की ही पहुंच है। लोग पत्रकारों पर विश्वास करते हैं और अपेक्षा करते हैं कि सही और प्रमाणिक जानकारी हमें पत्रकारों से मिल सकेगी। इसलिए हमें स्वयं जानकारी रखते हुए लोगों को जागरूक करने की आवश्यकता है। हर शब्द मायने रखता है वेबीनार के शुभारंभ में पब्लिक रिलेशन सोसाइटी ऑफ इंडिया भोपाल चैप्टर के अध्यक्ष एवं रोजगार और निर्माण पत्र के प्रधान संपादक पुष्पेंद्र पाल सिंह ने कोरोना के दौरान मीडिया कर्मियों की भूमिका विषय पर विस्तृत चर्चा की। उन्होने फेक न्यूज और अफवाहों से बचते हुये तथ्यपरक नैतिक पत्रकारिता के मूल्यों को अपनाने पर जोर दिया। उन्होने कोरोना रिपोर्टिंग के दौरान शब्दों के चयन मे बरती जाने वाली सावधानियों को उदाहरण सहित समझाया।उन्होने पत्रकारों का आह्वान किया कि वे संकल्प लें कि कोई भी भेदभाव और लांछन को बर्दाश्त नहीं करेंगे। भेदभाव और लांछन का कोई भी प्रकरण सामने आने पर तुरंत आवश्यक कार्यवाही करेंगे और पीड़ितों के मित्र बनकर सामने आयेंगे। यूनिसेफ सलाहकार आशीष चैबे ने कोरोना आधारित भेदभाव और लांछन विषय पर सत्र लिया।